Saturday, September 1, 2012

लो दिन बिता ,लो रात गई.....
सूरज ढलकर पश्चिम पंहुचा ...
डूबा , संध्या आई , छाई...
सौ संध्या सी वो संध्या थी...
क्यो उठते उठते सोचा था...
दिन में होगा कुछ बात नई |
लो दिन बिता .... लो रात गई...

© आशुतोष त्रिपाठी

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